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शहीद परिवारों के लिए बिहार सरकार का बड़ा फैसला

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देश की सरहदों की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीद सैनिकों के परिवारों के लिए बिहार सरकार ने एक संवेदनशील और ठोस पहल की है। राज्य सरकार ने शहीद सैनिकों के आश्रितों को खेती और आवास के लिए सरकारी भूमि देने की नई, स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया लागू कर दी है, जो तत्काल प्रभाव से प्रभावी हो गई है। इस फैसले को शहीद परिवारों को सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब शहीदों के परिजनों को जमीन के लिए वर्षों तक भटकना नहीं पड़ेगा और पूरी प्रक्रिया तय नियमों के तहत पूरी की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत शहीद सैनिकों के आश्रितों को उनके गृह जिले और गृह प्रखंड में ही सरकारी भूमि की बंदोबस्ती की जाएगी, ताकि वे अपने सामाजिक और पारिवारिक परिवेश से जुड़े रह सकें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भूमि बंदोबस्ती केवल ग्रामीण क्षेत्रों की विवादमुक्त सरकारी जमीन पर ही की जाएगी। इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने सभी जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। यह सुविधा केवल थल सेना के शहीदों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दायरे में बीएसएफ, सीआरपीएफ, बिहार मिलिट्री पुलिस, टेरिटोरियल आर्मी, बॉर्डर स्काउट्स, बीआरएफ, लोक सहायक सेवा, एनसीसी, होमगार्ड्स और असम राइफल्स जैसे बलों के शहीद जवानों के आश्रितों को भी शामिल किया गया है। योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित बोर्ड की अनुशंसा और कम से कम छह माह की संतोषजनक सेवा का प्रमाण-पत्र अनिवार्य किया गया है। सरकार ने शहीद परिवारों को आर्थिक संबल देने के उद्देश्य से यह भी निर्णय लिया है कि भूमि बंदोबस्ती के बाद आश्रितों से सलामी तो ली जाएगी, लेकिन पहले पांच वर्षों तक किसी भी प्रकार का वार्षिक लगान नहीं देना होगा, जिससे परिवार को आत्मनिर्भर बनने का समय मिल सके। विभाग ने यह भी साफ किया है कि यदि किसी आश्रित के पास पहले से निजी आवासीय भूमि उपलब्ध है, तो वह इस योजना के तहत पात्र नहीं होगा। साथ ही लाभार्थी का बिहार का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार शहीद सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यह निर्णय शहीदों के प्रति कृतज्ञता तथा उनके परिजनों के प्रति सरकार की संवेदनशील सोच को दर्शाता है। कुल मिलाकर, यह फैसला न केवल शहीद परिवारों को जमीन का अधिकार देता है, बल्कि यह भरोसा भी दिलाता है कि राज्य सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है।

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